शनिवार, 21 अप्रैल 2018

KISSA RAMPAL--KAMLA


किस्सा रामफल-कमला 

वार्ताः- गांव बिकलाना की स्वयम्भू पंचायत जब यह तालिबानी फरमान सुनाती है कि रामफल और कमला बहन भाई के रूप में रहेंगे तो रामफल दबाब में इस फैंसले को स्वीकार कर लेता है। स्वयम्भू पंचायती  रामफल को कमला के पास ले जाते हैं। कमला को जब सारी बात का पता चलता है तो वह कहती हैः मर जाऊंगी पर इस पंचायत का ये परिवार तोड़क फैंसला नहीं मानूगीं। कमला रामफल को क्या कहती है। भलाः
रागनी-1
तर्ज चौकलिया
खुद ब्याही नैं बाहण कहवै, पिया धर्म नहीं सै तेरा।।
पंचायत मेरै फांसी लारी, कसूर नहीं सै मेरा।
पंचायत की दाब मानकै, मनै मतना गेरै नरक मैं
समझ ना पाई क्यूकर तनै, करली नीत फरक मैं
तनै भाई कोन्या मानूं-चाहे, होज्यां जमा गरक मैं
ऊपर नै सिर ठारे पचंायती, अंहकार और हरक मैं
रही हाथ जोड़ मत प्राणनाथ, करो दीवे तैले अंधेरा।।
चालीस घर उजड़ ज्यांजै फरमान सिर माथै ना लाया 
राठी गोत की दादा गिरी, आज दहिया घणा घबराया
इन गोतां के चक्कर नै, दुविधा मैं रामफल फंसाया 
मान कै फरमान तालिबानी, वो बहोत घणा पछताया
पंचायत उजाड़ैगी बस्या बसांया, गरीबां का घर डेरा।।
दुविधा मंे दोनों जावैंगे, नहीं माया मिलै ना राम 
के सोच कै तनै पियाजी करया यो घटिया काम 
थू-थू करते लोग लुगाई, सारे शहर और गाम
लड़ां लड़ाई मिलकै पिया, पंचायत कै कसां लगाम
ईबकै तोड़ दिया तो बचांगे, ना पंचायत घालरी घेरा।
जी मेरा तिंरू डूबंू था, मनै ले लिया ईब सम्भाला
तेरा साथ निभाऊं कमला, चाहे हो ज्यान का गाला
एक औड़ नै होना होगा, ख्ंिाचग्या धुर का पाला
    लड़ाई कै म्है साथ रहवैगा, रणबीर बरोने आला
सघर्ष करांगे सब मिलकै नै, जब पटै देश नै बेरा।।
वार्ताः- कमला को उसकी नन्द ढांढस देती है। वह खुले आम तथा कथित पंचायत के फैसले का विरोध करती है। वह कमला को अपने साथ अपनी ससुराल ले जाने की बात करती है। कमला की हिम्मत बनती है। वह इस फतवे के खिलाफ लड़ने के लिए उठ खड़ी होती है। दोनों की आपस में बहुत सी बातें होती हैं। क्या बताया भलाः
रागनी-2
नन्दः क्यों रोवै कमला भाभी, कह दे मन की बात नै।
कमलाःके बूझैगी ननदी घणी काल्ली होरी सै गात मैं।।
पंचायत नै के हक सै क्यों फतवा इसा घुमाया री 
अपने पति ने भाई बना घटिया हुक्म सुनाया री
  उननै के हक सै भाभी यो कोर्ट क्यों बिठाया री
ये पंचायत महिला विरोधी सबकै साहमी आया री
म्तना हार मानिये जानां पंचायती औकात नै।।
पति भाई बनाया री बेशर्मां की पंचायत नै।।
जिब चाहवै पति मानै, जिब चाहवै भाई बनादे या
देकै फतवा गोतां का माणसां नै कसाई बतादे या
परम्परा की बात करती बुलधां की हलाई ल्यादे या
औरतां के हक खातर कद पंचात बुलाई दिखादे या
होसला राख कमला ननद खड़ी तेरे साथ मैं।।












वार्ताः रामफल की बहन सीमा व उसका जीजा रामफल को बहुत समझाते हैं तथा बुरा भला भी कहते हैं। सीमा कहती है कि कमला हुड्डा न होकर यदि राठी भी है तो क्या बात हो गई? कोई पहाड़ टूट पड़ेगा क्या। वह कमला का साथ निभाने की कसम खाती है और अपने भाई रामफल को क्या कहती है भलाः
रागनी-3
बात भले की कहूँ भाई कति मेरी बात मैं फीक नहीं।।
थारा कमला भाभी ताहिं न्यों भाण बनाना ठीक नहीं।।
उनै भाण कवहण की सोचै के फरक तेरे और कसाई मैं
विनाश काले या विपरीत बुद्धि कारण समझ गई भाई मैं
रामफल तेरी मां जाई मैं तेरी आच्छी लागती सीख नहीं।।
इतनी बात समझ लिए जिसी करेगा उसी भरै भाई तूं
मेरा तो इतना कहना क्यों पंचात तै घणा डरै भाई तूं
नादानी मत करै भाई तूं कमला कदे मांगै भीख नहीं।।
तेरी कमजोरी का बेरा भाई पाट लिया सै संसार मैं
हम महिलाओं का हक भाई घाट दिया सै घरबार मैं
चुप्पी छाई सै सरकार मैं भला-बुरा रहया दीख नहीं।।
कहै रणबीर रामफल सुनिये टेम पुराना बदल रहया
खेती करना खाना-पीना ब्याह मैं जाना बदल रहया
गोेत का बाना बदल रहया चलै पुरानी लीख नहीं।।

वार्ताः पूरे गांव में यह चर्चा का विषय बन गया। कुछ पुरूष कह रहे हैं कि क्या इस गांव को अमरीका बनाओगे? पुरूषों  का खासा हिस्सा यही चाहता था कि कमला रामफल भाई बहन बन जाएं। मगर औरतों का बड़ा हिस्सा इसके खिलाफ था। कई औरतों ने कहा-अब यह कैैसे हो सकता है। वे आपस में बातें करती हैं और क्या कहती हैं भलाः
रागनी-4
पेट मैं पलै साथ मैं क्यों तुम दो ज्यानां नै मार रहे।।
गया जमाना बदलक्यूं पाप की माला गल मैं डाल रहे।।
बालक का रिश्ता के होगा बाहन भाई बनावैं सैं
भाण भाई के रिश्ते कै बी क्यों कालस लगावैं सैं
गाम में जो बड़े पंचायती वे घणे दुष्कर्म करावैं सैं
छेड़खानी बलात्कार पै ना कदे पंचायत बुलावै सैं
कंस रूपी ये पंचायती बिकलाने मैं पिना धार रहें।
राठी और दहिया बीच ब्याह ये धुरतै होत्ते आये सै
चौटाला गाम मैं कई नै आपस मैं ब्याह रचाये सैं
हरेक गाम मैं गोत पन्दरा गये आज ये गिनाये सैं
किस किसनै बचाावांगे ये सवाल गये ईब ठाये सैं
क्यों इन मासूमां ने बिना बात के फांसी तार रहे।।
परम्परा वादी सो तै बैल की खेती ल्यादी हटकै रै
जंग लागै चाकू तै ओरनाल काटो सब डटकै रै
पुराना घाघरा कड़ै गया गोत क्यों थोरे अटकै रै
इतने गोत क्यूंकर बचैंगे बात म्हारै योह खटकै रै
ना पुराना ठीक सारा इसपै नहीं कर विचार रहे।।
इतनी प्यारी छोरी लाग्गै क्यों पेट मैं इनै मार रहे
खरीद कै ल्याओ यू पी तै जिब ना गोत विचार रहे
ब्याह शादी मुश्किल होरे ना नये नियम धार रहे
गोतां की सीम ये टूटैंगी लोग खड़े-खड़े निहार रहे
रणबीर बरोनिया पै पंचाती पिना ये तलवार रहे।।ा

वार्ताः सरोज कमला की बचपन की दोस्त है? यह कैनेडा में है। वह एक वैब साइट पर कमला के बारे में जानकारी हासिल करती है। अंग्रेजी के अखबार ‘दि ट्रिब्यून’ में भी खबर पढ़ती है। वह कमला के बारे में बड़ी चिंतित होती है। वह कमला को एक पत्र लिखती है। क्या लिखती है भलाः
रागनी-5
रोज पढूं खबर कमला अंग्रेजी के अखबार मैं। 
महिला फांसी तोड़ी जावैं बिकलाने के दरबार मैं।।
संविधान की खुल कै नै पंचायत नै धज्ज्यिां उड़ाई हैं
राजनैतिक नेतावां नै चुप्पी मामले मैं खूब दिखाई है
जमा शरम नहीं आई है जहर मिलाया घरबार मैं।।
प्रशासन खड़या देखै क्यों मेरै समझ नहीं आया हे
सविंधान का चौड़े मैं पंचायत नै मजाक उडाया हे
ना कोए कदम ठाया हे इस झझर की सरकार नै।।
कोर्ट मैं ब्याह करया था पंचात नै आज तोड़ दिया
भाण भाई का उसनै इसमैं ब्यर्थ नाता जोड़ दिया 
रामफल जमा मरोड़ दिया गोतां की तकरार नै।।
परम्परावादी रूढ़िवादी रणबीर ये नाश करैंगे हे
आगली पीढ़़़ी के बालक घाटा किस ढाल भरैंगे हे
के बेरा कितने लोग मरैंगे हे पंचातां की हुंकार मैं।।

वार्ताः दस गामां पंचायत के अध्यक्ष गांव बरवाना के प्रधान कर्मबीर को जब पता लगता है इस फैसले का तो उन्हें बहुत दुख होता है। वे इस तालिबानी फरमान से सहमत नहीं। क्या कहते हैं भलाः
रागनी-6
अठगामा पंचात राठी की बिकलाना फरमान गल्त बतावै।।
बरवाना का प्रधान कर्मबीर कोन्या सुर मैं सुर मिलावै।।
दसगामे नै कोए लेना देना ना तालिबानी फरमान तैेेे
राठी दहिया मैं ब्याह होवैं चाहूं बताया हिंदुस्तान तै
बण कसाई इंसान तै क्यूं बिकलाना घणी धौंस दिखावै।।
  राठी दहिया के छोरा-छोरी आपस मैं खूब बयाह रचावैं
कोए बन्दिश कोन्या पंचाती हम खोल कै नै बात बतावैं
हम बिकलाने मैं सबझावैं सडांध फैसले मैं तै घणी आवै।।
कमला रामफल पति पत्नि भाण भाई बनाना ठीक नहीं 
सविंधान सै भारत का इसका मजाक उड़ाना ठीक नहीं 
उत्पात मचाना ठीक नहीं इस ढाल की बात सुनावै।।
निजाम पुुर गाम दिल्ली मैं उड़ै जाकै खुद देख लियो
पिछड़ी समझदारी त्याग कै उड़ै जाकै माथा टेक लियो
चौबीस नै फैसले नेक कियो रणबीर बरोनिया समझावै।।

वार्ताः बिकलाना की गांव की दो आंगनवाड़ी कार्य कर्ताओ ने होसला करके इस फैसले का विरोध किया। बहुत हिम्मत की बात थी। उस वक्त पंचायत का आंतक था मगर फिर भी उन महिलाओं ने आवाज उठाई। क्या कहना है उनके बारे में कवि काः
रागनी-7
दुनिया नै मखौल उडाया, फैसला घटिया बताया
म्हारा नाक कटवाया, बेशर्मा की पंचात नै।।
कमला रामफल पति पत्नि उनपै अत्याचार किया
बिना बात पंचायत बुलाकै उन दोनों को लाचार किया 
बहण भाई बणवाया, किसा जुलम कमाया
गर्भ गिरवाना चाहया, बेशर्मा की पंचात नै।।
खाप पंचायत गैर कानूनी जानै दुनिया सारी देखो
फेर बी तालिबानी फतवे कर देती जारी देखो
घटिया बर्ताव करया, म्हारै मुश्किल जरया
कान्धे पर हाथ धरया, बेशर्मां की पंचात नै।।
इसी पंचाता का बहिष्कार होना चाहिये समाज मैं
नागरिक अधिकार मामला उठावां सही अन्दाज मैं
कचहरी हुकम सुनाया, कहैं फटकार लगाया
मुंह काला करवाया, बेशर्मां की की पंचात नैं।।
पहली जीत कमला की ढीले मत पड़ जाइयो
प्रशासन नै चुस्त करण नै खड़े होकै अड़ जाइयो
रणबीर गीत बनाया, सही हिसाब लगाया
परिवार घणा सताया, बेशर्मां की पंचात नै।।

वार्ताः प्रदेश के हाई कोर्ट ने पंचायत को फटकार लगाई और  शादी के मामले को न छेड़ने का हुक्म दिया और प्रशासन को हिदायत दी कि कमला रामफल को व उसके परिवार को सुरक्षा प्रदान करे। इससे अलग तरह का माहौल बनने लगा। क्या बताया भलाः
रागनी-8
चण्डी गढ़ कोर्ट की खबर नै एक न्यारा माहौल बनाया।।
धर्मबीर पंचाती बी गाम की कूणा मैं ल्हुकता पाया।।
टी वी पै जिब समाचार सुणे बिकलाने नै ली अंगड़ाई
पंचाती हांन्डै गली-गली मैं आगै के होवै कारवाई
प्रशासन की नींद उड़ाई कोर्ट नै फैसला इसा सुनाया।।
परम्परा वादी पंचात भाई इसी तावली हार ना मानै
और कसूती ढालां तीर तरकश के कमला पै तान्नै
करो चित चारों खान्नै जड़ मूल तै करद्ंया सफाया।।
गुगाहेड़ी गाम इसा जड़ै खेड़े का गोत बच्या नहीं
कोए गोत ना बचरया जिनै ब्याह उड़ै रच्या नहीं
हाहाकार उड़ै मच्या नहीं बिकलाने नै हाहाकार मचाया।।
निजामपुर गाम मैं राठी दहिया दोनों गोत बताये
कोए रोक टोक ना उड़ै ब्याह शादी आपस मैं रचाये
रणबीर नै छन्द बनाये ना न्यूंए पैन घिसाया।।
वार्ताः कुछ दिन बात काद्यान और लोहान में भी तकरार पैदा हो जाती है। वहां भी स्वयभंू पंचायत फतवा जारी करती है। प्रशासक वहां भी चुप रहता हैैैै। क्या बताया भलाः
रागनी-9
काद्यान और लोहान मैं बी गोतां का लाठा बाज रहया।।
घणी कसूती चुप्पी क्यों इनपै साध म्हारा राज रहया।।
हरेक गाम मैं इन गोतां की कसूती गलेट लाग रही सै
किस-किस तै परहेज करैं लोगां मैं चिन्ता जाग रही सै
बेरा पटता कोन्या पंचात क्यूं बण जहरी नाग रही सै
दे फतवा भाई बाहण का कौन सा अलाप राग रही सै
इनके गाने बजाने तै हो बेसुरा सुर और साज रहया।।
समचाने मैं रावत नैन ग्रेवाल फौगाट बताये देखो
कटारिया सुहाग जैन गैल पुनिया बसे दिखाये देखो
काजला माल्हान तोमर कदे कदीमी रहते आये देखो
छिल्लर नेहरा सिंघल मिलकै चौदां गोत गिनाये देखो
मां दादी और पड़ैंगी उकानी हो मैं भाजम भाज रहया।।
गोतां की या जड़ कसूती म्हारे बालकां का नाश करैगी
सदा बदलाव आये कहते नहीं म्हारै या बात जरैगी
बहण भाई के करां फैसले सारी दुनिया नाम धरैगी
गोतां की रीत पुरानी इननै छोड़ कै या बात सरैगी
गोतां कारण बिगाड़ आया मांग यो सही इलाज रहया।।
पूरे समाज का मसला सै एक जात का मसला कड़ै सै 
पूरे गाम का मसला सै माणस न्यारा-न्यारा लड़ै सै
होगी बाधू बदनामी या करनी तले नै नाड़ पड़ै सै
यो जात गोत सारी हाण मानवता साहमी आण अड़ै सै
सबनै गेल्यां ले कै बदलां रणबीर दे आवाज रहया।।


वार्ताः प्रशासन कानून बनाये रखने को फिर इन स्वयंभू पंचायितियों को अहमियत देता है यह चिन्ता का विषय है। इन पंचायतों को कोई मान्यता प्रशासन की तरफ से नहीं मिलनी चाहिये। इस प्रकार के ब्याह शादी के मामलों में तो खासकर दोषी पक्ष ही न्याय कर रहा है यह कैसी विडम्बना है? हरियाणा का सभ्य जन इससे काफी आहत महसूस करता है मगर अभी चुप है। कवि ने उसे आवाज देने की कोशिश की है। क्या बताया भलाः
रागनी-10
हरियाणे की जनता बोली ना पंचाती कोए बी पकड़या।।
बातें सब आई गई होगी ना किसे का कुछ बी बिगड़या।।
बिकलाना के फतवे तै हरियाणा घणा शर्मशार हुया
आदिम युग मैं बसै हरियाणा दुनिया मैं यो प्रचार हुया
तथा कथित पंचातां पै नही जमा शिकन्जा जकड़या।।
वे कतल बी करैं माफ होज्यां म्हारे ब्याह मैं रोल्ला क्यों
आज बूझ होरी जमाने मैं उसकी चाल्लै सबतै ओल्ला जो
प्रशासन बी दाब मानता तत इसका तै योेहे लिकड़या।
पूरी ढालां पाबन्दी लागै नहीं इसकी कोई बूझ होवै
बिना बात वे तालिबानी फतवे नहीं कोए इनके ढोवै
खामैखा मैं सारा बिकलाना मानसिक तनाव मैं जकड़या।।
ब्याह शादी हों कानूूनी पंचायतां का कोए दखल नहीं 
इनके साहमी होए बिना इनकै आवै जमा अकल नहीं
रणबीर बरोने आला इनके फतव्यां कै साहमी अकड़या।।




KISSA IMRANA


किस्सा इमराना और नूर इलाही

1 -
भारत में उत्तर प्रदेश का हम सारे जिकरा आम सुणां।।
सबतै बड्डा प्रदेश बताया बात इसकी सुबो शाम सुणां।।
लखनउ उत्तर प्रदेश की राजधानी बताई जा
जुर्मां की मशहूर राजधानी मुजफ्फर नगर सुझाई जा
डकैती ब्लात्कार लूट-पाट की बढ़ती कतार दिखाई जा
चोरी जारी अर मार-पीट की खबर अखबारां मैं पाई जा
समाज चल्या गया रसातल मैं लाश मिलै गुमनाम सुणां।।
मुजफ्रफर नगर जिले नै अपराध मैं नाम कमाया आज
या बेरोजगारी बढ़ती जा नौजवान रिवाल्वर ठाया आज
ब्यूटी कम्पीटीशन इसे चलाये महिला शरीर बिकाया आज
अफरा तफरी मचा राखी गुण्डा राज सारै फैलाया आज
सबकै साहमी छोरी ठाले ज्यां बात शहर और गाम सुणां।।
पंचायत  नै इस जिलैं मैं तालिबानी हुक्म घणे सुनाये
कोए जात बची कोन्या जिससे लवमैरिज नहीं तुड़वाये
कानून हाथ मैं लेवै रोजाना गये सैकड़ा प्रेमी मरवायें
म्हारे थारे बरगे कायर भतेरे जो विरोध ना कर पायें
बर्बर तै बर्बर फैसला करया इसे इनके काम सुणां।।
जवान छोरी का बाहर लिकड़ना आज घणा भारी होग्या
ना मन मर्जी के लत्ते पहरैंगी आज फतवा जारी होग्या
इसी हालात देख समाज मैं आज मन बहोतै खारी होग्या
अपणा आप्पा ना देखै यो ताशों का इसा खिलारी होग्या
रणबीर सिंह दुख मैं लिख्या आज उसका यो पैगाम सुणां।। 
2
मुजफ्रफर नगर जिले मैं चरथावल गाम सुन्या होगा।।
इसे गाम की रहने आली सै इमराना नाम सुन्या होगा।।,
सादी भोली इमराना नै नूर इलाही तै निकाह कराया
नूर इलाही पै इमराना नै फेर पूरा विश्वास जताया
नहीं पीछे कदम हटाया रही सै गुमनाम सुन्या होगा।।
पांच बालक इमराना कै सास ससुर साथ रहवैं थे
मुश्किल होवै गुजारा उनका दुख दिन रात सहवैं थे
कितै अपनी बात कहवै थे किस्सा आम सुन्या होगा।।
क्यूकरै करकै काम धन्धा बस धक्के दिनां नै देरे
गातां पै निशान पिट्टण के सब अपने गाता पै लेरे 
गरीबी नै कसूते घेरे म्हंगाई मैं चढ़ै दाम सुन्या होगा।।,
इमराना नेै एकाध बै ससुर की नजर चुभती लागै
उसके साहमी तै तावली सी वा दीवार की और भागै
रणबीर की कलम जागै जिंका बरोना धाम सुन्या होगा।।
3
स्वयभूं पंचायता नै कई प्रेमी जोड़े मरवा दिये।।
प्रशासन आंख मींच रहया चाले घणे करना दिये।।
एक पंचायत नै कठ्ठी होकै प्रेमी युगल पै प्रहार किया
थप्पड़ लात घूसे मारे नाड़ पै चला हथियार दिया
प्रेमी युगल बेहोश पड़या घणा मजबूर परिवार किया
जिन्दा दोनों जला दिये चुप रहने को लाचार किया
इसी बर्बर पंचायत होगी जिन्दा माणस जलवा दिये।।
सारे गाम गुहान्डा मैं पंचायत जुलम ढावण आली
जो शादी करणा चाहवैं उनके राह मैं आवण आली
छोरा-छोरी नै दिन धौली ये डायन खावण आली
ये तालिबानी करै फैसले घरां मैं आग लावण आली
बीर मरद तीन साल तै बाहण भाई ये बणवा दिये।।
औरत का हरेक जात मैं दोयम दर्जा दिया दिखाई
घर मैं भी महफूज नहीं रिश्तेदार बणैं जुल्मी अन्याई
घर तै बाहर सफेद पोशां नै लिहाज शर्म सब तार बगाई
एक औड़ नै कुआं दीखै दूजे औड़ नै दीखै सै खाई
इस हाई कोर्ट नै कई जगां डोगे उल्टे धरवा दिये।।
अन्तहीन कहानी से ना इसका कितै कोए छोर दखे
गाम की इज्जत के बहाणै ना थमै जुलम का दौर दखे
बिना बात की बातां पै मचै चौगरदें शोर दखे
औरत की जिन्दगी अन्धेरी कद होवैगी भोर दखे
रणबीर की कविताई नै नयनां आंसू भरवा दिये।।
वार्ता  4
इमराना के सुसरे नै एक दिन नीत डिगा दी अपणी
बदफेली करकै इमराना गेल्यां जात दिखा दी अपणी
रोती-राती चाल कमरे तै अपणी सासु पास आई दखे 
अपनी दुख भरी कथा उसनै सास तै सुनाई दखे
सासू सुणकै दुखी हुई दिल की बता दी अपणी।।
सासू नै मिन्नत करी इमराना बोल चुपा की रैहज्या
उसनै सबक सिखाउंगी मैं इस बदमफेली नै सैहज्या
इमराना नै चुप रैह कै कीमती बख्त गवा दी अपणी।।,
तीन दिन पाछे इमराना की भाभी फेट्टण उसनै आई 
भीतरला भर आया फेर भाभी तै सब खोल बताई 
भाभी सुणकै दंग रैहगी तसल्ली माड़ी दिवा दी अपणी।।
पति देवर सबको जाकै फेर भाभी नै बात बताई 
चरथावल मैं पहोंच गये मोहम्मद की करी पिटाई
रणबीर नै कलम घिसाई सही छन्द बना दी अपणीेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेे।।
वार्ता  5
पूरे गाम मैं बात फैलगी तरां-तरां की चर्चा होण लगी।।
कोए ससुर नै गाल बकै कोए इमराना नै डबोण लगी।।
जितनें मुंह उतनी बात घुसर-फुसर खूब चली फेर
गाम कै गोरै बात बणावैं खाली बची नहीं कोए गली फेर
उस कै फांसी घली फेर पंचायत उसनै टोहण लगी।।
जाति की पंचायत बुला इसमें अली मिंया दोषी पाया
बोले अदालत मैं पेश करो इसपै जागा केस चलाया
पंचायत नै फतवा सुनाया इमराना सुणकै रोण लगी।।
नूर की इलाही की माता पंचायत नै हुक्म सुणाया उड़ै
पति नूर इलाही इमराना का उननै बेटा बनाया उड़ै
मातम कसूता छाया उड़ै पंचायत किसे बीज बोण लगी।।
गाम का कोए माणस बी इमराना कान्ही ना खड़या हुया
धार्मिक संगठन दड़ मारगे जण सांप सा लड़या हुया
रणबीर सिंह अड़या हुया कलम छन्द पिरोण लगी।।
वार्ता  6
कई महिला आगै आई खड़ी होगी इमराना की जड़ मैं
बोली हम तेरा साथ देवां जिब ताहि सांस म्हारे धड़ मैं
जिनके शोहर बाहर जोर उनका मुश्किल जीणा होग्या
जिनके पति जेला मैं उननै मुंह अपणा सीणा होग्या
कई साल विछोह मैं कटते घूंट सबर का पीणा होग्या
सुसरा म्हारा करै बदफेली वो माणस कमीणा हो ग्या
किसकै धोरै फरियाद करां पुरूष तबका सै अकड़ मैं।।
एक घर का जिकरा कोन्या पूरा गाम इसकी मार मैं
एक गाम का कित जिकरा पूरा जिला अन्धकार मैं
एक जिनाना उत्तर प्रदेश पूरा कस्या अत्याचार मैं 
एकला यू पी ना भारत पूरा रोल माचगी संसार मैं
बदफेली इसी फैल रही जण घुण लाग रया बड़ मैं।।
इस सारे मसल्यां मैं फेर औरत का कसूर बताया जा
राम के राज मैं सीता का अग्नि परिक्षण करवाया जा
समाज के रिवाज किसे कलंक महिला पै लाया जा
माणस बिना नकेल घूमै औरत कै नकेल घलाया जा 
इमराना मत घबरावै ना दम पंचायत की कड़ मैं।।
महिला संगठन नै मिल कै एफ आई आर दर्ज कराई
मुल्ला मौलवी कठ्ठे होंगे इमराना की करी बुराई
कुरान के पन्ने उल्ट कै नै इमराना अलग करवाई
धर्म ग्रन्थ देख लिए सारे महिला सबमैं गई दबाई
रणबीर पोल खुलगी उनकी जो रहया करते अकड़ मैं।।
वार्ताः 7
जब इमराना की भाभी वापस जाकर इमराना के भाइयों को सारी घटना के बारे में बताती है तो काफी गुस्सा करते हैं और इमराना की सुसराल आकर सारी बात की तहकीकात करते हैं। इमराना रोते-रोते अपने ससुर की काली करतूतों के बारे में बताती है। उसके भाई अली मोहम्मद की पिटाई करते हैं और क्या कहते हैं भलाः
ये सारी हद पार करदी सुणले अली मोहम्मद कसाई।।
के सूझी शरीफ बदमाश तनै इस घर मैं आग लगाई।।
घर की बहु बेटी बराबर हो सै गन्दा विचार क्यों आया
इसकी जिन्दगी खराब करी जालिम बता तनै के थ्याया
शोहर गेल्यां नहीं रहवैगी मुल्ला जी नै फरमान सुनाया
शान्ति तै रहया करैं थे क्यों जिन्दगी मैं तूफान मचाया
चरथावल मैं भांत-भंात की बात करते लोग लुगाई।।
मोहम्मद पिट्या जिब उड़ै गाम मैं बात फैलगी सारै
किसनै बेरा था बड़ी पंचायत या डायन का रूप धारै
धर्म का कट्टर वाद छाग्या इमराना नै जिन्दा मारै
ससुर अदालत भुगतैगा यातो बेटा पति नै पुकारै
पंचायत फैसले नै जिले की करवादी जगत हंसाई।।
इमराना नूर इलाही नै कठ्ठे रैहण का मन बनाया
इमराना के ननिहाल मैं हटकै  अपणा घर बसाया
वे पति पत्नि बणे रैहगे जनता कै सांस मैं सांस आया
देवबन्द मैं दारूम उलूम के मुक्ती नै फेर फरमाया
इसी घटना पाछै मुक्ती नै न्हारे रैहण की बात बताई।।
मुजफ्रफर नगर मैं उलूम का असर बहौत बताया
टीवी नै दारूल उलूम का घर-घर मैं संदेश पहौचाया
जनता झुकी मुक्ती साहमी नूर इलाही चरथावल आया
धर्म के ठेकेदारा नै इनकी जिन्दगी मैं जहर मिलाया
रणबीर नै भारी मन तै करनी पड़री सै कविताई
वार्ता  8वार्ता ;8द्ध
विवाद उठ्या बहोत घणे इमराना के सुसरे कान्ही पाये
मुस्लमान कुछ पढ़े लिखे इमराना के पालै मैं आये
डाक्टर ताहिर महमूद नै फेर बात कही चतुराई तै
मौलाना डाक्टर करीम मदनी बात समझी गहराई तै
जनाब कल्बे सादिक बरगे वाकिफ कुरान की लिखाई तै
सारेे बोले फतवा ठीक नहीं सजा मिलै ससुर अन्याई तै
थोड़े दूर हुये काले बादल जो थे इमराना उफपर छाये।।
एक सुर मै फतवा इननै एक सिरे तै नकार दिया सै
मां बेटे का रिश्ता उनका बिल्कुल ना स्वीकार किया सै
पंचावत जो फतवे आली उसको जमा दुत्कार दिया सै,
मुक्ती का ब्यान सबनै बता एक तरफा प्रचार दिया सै
इक्शवीं सदी उत्तर प्रदेश मैं जाते किसे फतवे सुनाये।।
इमराना की दिमागी हालत दिन और रात गिरती जावै
धर्म के खिलाफ नहीं जाउं इमराना बार-बार दोहरावै
पति की साथ रहवै इमराना वा दिल तै न्यौए चाहवै
अल्लाह कितै सुणता होतै उसनै अपणी बात सुनावै
ृृ हिन्दु मुस्लिम गाम के आज सब इमराना साथ बताये।।
ना इमराना एक एकला मामला अजीजन स्टेज पै आई
जिनके पति बाहर जारे सैं उनकी याहे तै व्यथा बताई
ससुर नै बहु जबरन बीवी बहोत धरा मैं आज बनाई
इमराना गेल्यां खड़ी सां म्हारी होगी जरूर सुनाई
रणबीर बरोने आले नै जी लाकै सही छन्द बनाये।।
वार्ता  9
ये पंचायत खड़ी पावैं सै हक मैं जालिम ब्लात्कारी कै
महिला की कोए जात नहीं भगवान जिसे न्याय कारी कै
चरथावल की पंचायत नै एक ब्लात्कारी जमा बचाया
पांच चप्पल मखाकै ब्लात्कारी का पिंड छुटवाया
अमले कै सांप सूंघग्या पुलिस अफसर सरकारी कै।।
औरत के खिलाफ हमेश्या फतवे पंचायत के जारी होवैं
पति पत्नि तै भाई बाहण बणो ये हुकम भारी होवै
थाणे मैं करैं बदफेली आग लागो इसी थानेदारी कै।।
चौदवीं सदी के फतवे ये आज भी क्यूकर चाल रहे रै
औरत कै लगवा दे फांसी ये दिखा कसूते कमाल रहे रै
समानान्तर कानून व्यवस्था लादे बट्टा इज्जत म्हारी कै।।
हरियाणे मैं स्वयभूं पंचायत उपर नै मुंह ठारी सैं
इनकी साहमी बहोत पार्टी अपणी पूछ हिलारी सैं
रणबीर सिंह नै कलम उठाई खिलाफ अत्याचारी कै।।
वार्ता   10
मुलायम सिंह नै मुंह खोल्या, वोतै बहोतै माड़ा बोल्या
नहीं मामला सही तोल्या, इमराना छोड्डी मंझदार मैं।।
धार्मिक पंडयां के दरबार मैं इमराना ले जाकै छोड्डी
ृृ ये कठमुल्ले मुस्लमान घलवा देंगे उसकी तै गोड्डी
क्यूकर इसी बात करी सै, महिलावां कै नहीं जरी सै
उसकी बुद्धि क्यों मरी सै, इमराना छोड्डी मझदार मैं।।
धार्मिक हिंदु इमराना की मदद करण नै आगै आये
हिंदु महिलावां की खातर कदे नहीं ये टोहे पाये
आरएसएस के खेल ये, सती प्रथा मैं गेरै तेल ये
औरत की बनादे रेल ये, इमराना छोड्डी मंझदार मैं।।
हजारां सालां की जकड़न सहज-सहज या टूट रही
जिसनै जकड़न तोड़ी चाही उसे की कड़ नै कूट रही
रणबीर सिंह बरोने आला, लिखता सब सफेद काला
होग्या जमा मुंह काला, इमराना छोड्डी मंझदार मैं।।
वार्ता   11
कविता और जगतार नै जिन्दगी साथ बितानी चाही रै।।
जिब तै लाग्या इसका बेरा गाम नै पंचायत बुलाई रै।।
खोखर गोत की छोरी सै कुन्डु गोत का छोरा गया बताया
ब्याह गाम की गाम मैं कैसे हो माहौल पूरा ये गरमाया
दोनूं पढ़ैं दिल्ली यूनिवर्सिटी मैं गाम नै पता लगाया
साथ जीवांगे साथ मरांगे उननै यो सन्देह पहोंचाया
एक बै पंचायत अधम उठी कोन्या पार बसाई रै।।
कुन्डु छोरी दूजे गाम की खोखर ब्याह कै ल्यावैं रोज 
खोखर अर कुन्डु दोनों गोत क्यूकर आंख मिलावैं रोज 
बिना बात की राड़ ठारे सैं हमपै ऐतराज लगावैं रोज
गाम का लेकै बाहना मतलब अपणा साध्या चाहवैं रोज
धरती पै निगाह काका की बेटी बदचलन बताई रै।।
कविता और जगतार नै गाम मैं आना-जाना छोड़ दिया
काका नै दारू प्या प्याकै बिठा पंचायत मैं जोड़ लिया
दोनुआं के धरक्यां ताहिं बोले कहो कति नाता तोड़ लिया
जीन्ते जी क्यूकर औलाद मारैं पंचात नै पाछा मरोड़ दिया 
जात और गाम बाहर की पंचात नै गुहार लगाई रै।।
दोनुं परिवार बाहर काढ़े दर-दर के धक्के खावैं थे
मतना करो शादी कविता बार-बार सब धमकावैं थे
जगतार कविता उल्टा अपने मां बाप नै समझावैं थे
कविता का काका और ताउ सब खेत कब्जाया चाहवैं थे
उकसा कविता का भाई जगतार कै गोली मरवाई रै।।




HERO HONDA

हीरो होंडा
वार्ता
एक अहम सवाल है कि होंडा कम्पनी के मजदूरों को संघर्ष करने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ा। तीन हजार से ज्यादा श्रमिकों में से मात्रा 750 ही स्थाई मजदूर हैं बाकि सारे के सारे ठेेकेदार के अस्थाई मजदूर हैं जबकि सारा काम स्थाई प्रक्रति का है। बहुरार्ष्टीय कम्पनियों के बारे में जो सब्ज बाग दिखाये जाते हैं असल में वस्तु स्थिति वैसी नहीं है। कार्य स्थितियों की असली हकीकत यह है कि जापानी अधिकारी द्वारा श्रमिकों  को लात मारने की बात अब सामने आई है। महिलाओें तक के शौंचालयों के दरवाजे इसलिये उतरवाये गये कि वहां बैठकर मजदूर आराम फरमाते हैं। इससे अपमानित होकर मजदूरों ने संगठन बनाया जिस पर चार मजदूरों  को बर्खाश्त कर दिया गया। ये चारों यूनियन के मुख्य पदाधिकारी हैं। मजदूरों की मीटिंग करते हैं और यूनियन बनाने की बात करते हैं। क्या कहते हैं भलारू
1-
सुणल्योेे सब साथी ललकार, होल्यो मिलकै नै तैयार
आज या मन मैं ठानी सै।।
होन्डा नै किया कसूता वार, इनै मजदूर दिया जमा मार
मालिक सै यो बैरी म्हारा, नाश करया से इसनै भारया
ईंकी काट बिछानी सै।।
बोनस म्हारा खत्म करैं देखो, ये अपणे घरां नै भरैं देखो
हम इननै सां ख्ूाब भकाये, आपस के मैं हम लड़वाये
ईब राड़ मिटानी सै।।
कर दिया सत्यानाश देश का, बेरा पटग्या अब क्लेश का
घणी बीमारी देश मैं छाई, हांेडा करैगी खूब तबाही
ईब या बात सुनानी सै।।
दो किल्ले आला जमा मरग्या, मजदूर कै टोटा घर करग्या
बिना लाल झण्डे के भाई, कोन्या होवै रणबीर भलाई
आज जनता हुई स्यानी सै।।े
वार्ता
मजदूर अपना संगठन बना ही लेते हैं। कम्पनी असल में मजदूरों को यूनियन बनाने का अधिकार देना ही नहीं चाहती। इसके विपरीत दुनिया के अमीर देशों का संगठन जी-8 है और भारत में आई सी आई, फिक्की, ऐसोचेम आदि संगठन अद्योग पतियों ने बना रखे हैं जो संयुक्त रूप से सरकार को निर्देशित करके अरबों की रियासत प्राप्त करते हैं। कम्पनी की इस गैर कानून ताला बन्दी कर दी गई और समाचार पत्रों में विज्ञापन छपवा कर मजदूरों पर गैर कानूनी हड़ताल करने का आरोप मढ़ दिया। सच्चाई यह है कि मजदूरों द्वारा शपथ पत्रा लिखकर देने के बावजूद उन्हंे काम पर नहीं चढ़ाया गया। दो मजदूरं  गेट के बाहर बैठ कर बातें करते हैं और क्या कहते हैं भलाः
2-
हम दिये धरती कै मार, पुलिस प्रशासन के वार
करने हाथ पड़ै दो च्यार, सुणो हरियाणा के नर नारी।।
छोटी-छोटी बातां के उपर कमर तोड़ कै धर दी
ृृ बिना बात म्हारी करैं पिटाई नाड़ मोड़ कै धरदी
लिहाज शरम खत्म करदी, क्यों हांडी पाप की भरदी
झूंठी दिखावै हम दरदी, होन्डा जुल्म कमाया भारी।।
कारखाना खुद बन्द करवादें तोहमद हम पै लावैं
गुन्डागरदी खुद करते मजदूरा नै गुन्डे बतावैं
मजदूरां का मोर बनाया, चाहया हमतै सबक सिखाया
सैन्टर इननै खूब भकाया, बात बता कै झूठी सारी।।
होन्डा गेल्यां यारी दीखै इन नेता म्हारयां की
एक बोली बोलैं चिन्ता ना मजदूर बिचारयां की
असली चेहरा साहमी आया, बहोतै घणा जुल्म ढाया
हरियाणा बदनाम कराया इज्जत महफूज ना म्हारी।। 
छह म्हीने तै मांग म्हारी नहीं सुनता होंडा बताया
लोक आउट कर चाहवै मजदूरां नै कति भगाया
अनैतिकता मैं पलैं बढं़ै ये नैतिकता के नारे गढ़ैं ये
मजदूरां की छाती पै चढ़ैं, मनै रोल लागती जारी।। 
वार्ता
असल में असंगठित क्षेेत्रा के अलावा संगठित क्षेत्र में हरियाणा में गुड़गांव, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत आदि में कई वर्ष बाद ऐसा श्रमिक उभार है जिसके आधार में संकट की मार और रोजगार की अनिश्चतता के चलते इक्ठ्ठा हुआ रोष मौजूद है जो अभिव्यक्त हो रहा है। जब भी वह संगठित दिशा की तरफ कदम बढ़ाता है तो बहुुराष्ट्रीय कम्पनियां तिल मिला उठती हैं और इसे जड़मूल से उखाड़ने की पूरी प्लान बनाती हैं। असल में यह बेरोजगारी का अभिशाप इन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के लिये बरदान साबित हो रहा है। गुड़गांव में पिछले डेढ़ दशक में उभरी आलीशान बहुमंजली इमारतों में चल रहे कॉल सैन्टरों में पूरी रात हमारे उच्च कुशलता प्राप्त  युवक-युवतियां कम्प्यूटरों पर काम करते हुये पश्चिमी देशों के ग्राहकों की भद्दी गालियां फोन पर सुनने को मजबूर हैं। अमीर लोग अमरबेल बन कर मेहनत करने वाले लोगों को लूट रहें हैं। एक दिन मजदूर नेता मजदूरांें को सम्बोधित करते हुये क्या कहता है भलाः
3-
एकले होंडा का मसला ना, मसला हरियाणे का विकास का।।
बिना रूजगार विकास हो रास्ता खतर नाक विनाश का।।
मुट्ठी भर तो आड़ै एैश करै बाकी का किसे नै फिकर कड़ै
डेढ़ करोड़ हरियाणी वासी हम सबका यो जिकर कड़ै
कहदूं  तो इनकै नाग लड़ै नहीं बेरा जमा इतिहास का।।
इन दारू के ठेक्या उपर माफिया कब्जा जमा रहे
पाणी मिला जहर पिलावैं कफन दुनिया के सिला रहे
झूठे आसूं ये बहा रहे कहना सरतो और सुुभाष का।।
अमरबेल बणकै नै अमीर ये मेहनत कश नै लूट रहे
म्हारे थारे बरगे दिन काटैं इनके दिन कांचे टूट रहें
बनवा सफारी सूट रहे पड़या नंगा बदन रोहतास का।।
जापनी जर्मनी कम्पनी लूटैं करैं बहाना म्हारी भलाई का
लाखां करोड़ा लेज्यां सालाना सविता कविता भरपाई का
देश हटकै गुलाम होवैगा रणबीर बेरा इस अहसास का।।
वार्ता
विदेशी निवेश को मुद्दा बनाकर हाय तौबा करने वाले जो लोग वैश्वीकरण के मानवीय चेहरे की बात करते हैं उसकी पोल खुलते देर नहीं लगती जब वे बड़े से बड़े पुलिस अत्याचार , राष्ट्रीय संपदाओं की लूट, आर्थिक घोटाले और किसानों द्वारा की गई आत्महत्याओं पर होने वाली चर्चाओं को फालतू की बात मानते हैं । साथ ही पुलिस का असली चेहरा सामने आने में देर नहीं लगती। मजदूर नेता अपने साथियों को हरियाणा की पुलिस के कामों और कारनामों के बारे में बताते हुये क्या कहते हैंः
4-
आज की पुलिस किसी होगी सब सुणियो ध्यान लगाकै।।
जुल्म का कोए ढिकाणा ना जब देखी नजर गड़ाकै।।
बिना चाट के हरियाणे की भैंस दूध ना देवै
इसका दूध पुलिसिया पीकै खूबै रिश्वत लेवैं
भगवान किश्ती खेवै आज बैठ्या इनके घर आकै।।
दुनिया चाहे मेरो तिसाई थाणेदार बिसलेरी पाणी पीवै
और किसे की प्रवाह कोन्या बस पीस्यां खातर जीवै
सांझ ने सारा थाना धुत पावै कदे देखल्यो जाकै।।
बोलां तो होंठा नै सीवै न्यों होंडा व्यापार बढ़ावै
चुगली चांटी डांडी मारै सब हथकण्डे अपणावै
कति शर्म ना आवै बोनस मजदूरां का खाकै।।
हरियाणा पुलिस मैं दलाल इनके कई लोग बतायें सैं
अपणी गोझ भरण की खातर जुल्म घणे कराये सैं
रणबीर मजदूर सताए सैं पीस्से मालिकां पै खाकै।।
वार्ता

होंडा कम्पनी में मजदूरों की जमकर पिटाई की जाती है। लोगों को इससे पहले होंडा कम्पनी में क्या कुछ चल रहा है इसकी ज्यादा जानकारी नहीं थी। टीवी पर सबकुछ दिया गया। होंडा के एक कर्मचारी की मां यह सब उड़ीसा के गांव में बैठी देख रही थी। उसका बेटा कोसों दूर गुड़गांव में दो साल से होंडा का कर्म चारी है यह सब देख कर कर्मचारी की मां क्या कहती है भलाः
5-
मेरा कालजा धड़क्या रे मजदूरां की देख पिटाई।।
ईस्ट इंडिया कम्पनी की मनै याद एकदम आई।।
फिरंगी बणकै आये व्यापारी भारत देश म्हारे मैं
सहज-सहज आड़ै राज जमाया भारत देश सारै मैं
कारीगरां के गूठें कटा दिये जुल्मी बणे अन्याई।।
ईस्ट इंडिया बणी कम्पनी हजाराम हजार देश मैं
नई गुलामी की हटकै नै ल्यादी समों देश मैं
इस होंडा कम्पनी की सरकार रूखाली थ्याई।।
यूनियन बनाने का हक म्हारा कम्पनी खोस्या चाहवै
गुंडा करदी खुद करती कर्मचारी नै बुरा बतावै
कई सौ मजदूरां के उपर लाठी कसूत बजाई।।
निष्पक्ष जांच का मतलब इस होंडा का पक्ष लेवैं ये
सबनै पड़ी स्याहमी दीखै मजदूरां का ना साथ देवैं ये
रणबीर सिंह कहै उकी कलम ना पूरी बात लिखपाई
वार्ता
सवाल उठाया गया कि कानून किसने अपने हाथ में लिया। हिंसा पर पहले कौन उतारू हुआ। दोषी कौन है- मजदूर अथवा पुलिस? अज्ञान स्थान पर रखे गये मजदूर नेता खुशीराम की बहन बीरमती पुलिस का लठ छीन कर अकेली उनके सामने हो गई। कल को सवाल उठ सकता है कि बीरमती ने कानून अपने हाथ क्यों लिया? उस कम्पनी को कोई दोष नहीं दे रहा जो कानून को सिरे से ही नहीं मानती। होंडा कम्पनी पिछले दो महीने के दौरान भाड़े के गुडों से मजदूरों और उनके यूनियन पदाधिकारियों पर दर्जनों जान लेवा हमले करवा चुकी है। यदि लठ को ही कानून कहा जाने लगा जो उपायुक्त के हाथ में भी था तो सब जानते हैं वह किसके हाथ में है और वह किसके लिए प्रयोग हो रहा है। तरह-तरह की मीडिया में बाते होती हैं। क्या बताया भलाः
6-

कोए कुछ कहरया कोए किमै कोए कुछ पड़ते लावै सै
कोए मजदूरां नै बुरा कहै कोए होंडा नै गलत बतावै सै
अपणे-अपणे ला चश्मे गुड़गामा देख रहे सैं
गद्दी आले कहै रोटी राजनीति की सेक रहे सैं
उपर-उपर की बात करैं नहीं तह मैं कोए जावै सै
दो ढाला की राजनीति एक आच्छी एक भुण्डी हो
आम आदमी नहीं समझ पावै इसकी जो घुण्डी हो
एक जनता की बैरी दूजी जनता का साथ निभावै सै
बाजार वाद के नाम पै आज लूट मचारी सरमाये दारी
अमीर घणे अमीर होंगे या गरीबी दूनी बढ़ती जारी
पाले ख्ंिाचेगे आहमी साहमी कोए खड़या खड़या लखावै सै
अमीर देशां की पूंजी हटकै गुलाम बणाणा चाहवै सैं
विकास करैगी इस बहानै महारे हाड मांस नै खावै सैं
रणबीर सिंह कमेरे के पाले मैं रोजाना कलम घिसावै सैं
वार्ता
बार-बार यह कहा जा रहा है कि बाहरी तत्वों ने यह सब करवाया है। असल में बात यह है कि जो अब बाहरी तत्वों की बात कर रहें उन्ही लोगों ने क्षेत्राीय भावनाएं भड़का कर पहले तो होंडा के मजदूरों को ही बाहर का बताया गया ताकि उनकी एकता तोड़ी जा सके। दूसरे नवम्बर पर ट्रेड यूनियन पदाधिकारियों को ही बाहरी बताया गया ताकि उनकी एकता तोड़ी जा सके। यही नहीं सांसदों तक को बाहरी कहा गया। जानकारी होनी चाहिये कि पिछले कई महीनों से केवल होंडा कम्पनी के मजदूर ही संघर्षरत नहीं थे बल्कि अन्य कई कारखानों के मजदूर भी आंदोलन कर रहे थे। इन सबने मिलकर सयुंक्त मंच बना रखा था। 25 जुलाई के जुलूस में होंडा के श्रमिकों के अलावा उन युनिटों के श्रमिक भी शामिल थे और घायल हुये तथा जेल भी गये। कोइ पूछने वाला है कि नहीं कि जापानी कम्पनी तो बाहरी नहीं और यहां के लोग बाहरी हो गये। फिर तो बेरी का एम एल ए भी  बाहरी उसे क्या हक है ब्यान देने का होंडा कम्पनी पर। बड़ी बेहुदा बाते की जा रहीं थी। हरियाणा की असल में किसे परवाह है। अत्याचार बढ़ रहे हैं। एक मजदूर गुड़गांव के अस्पताल में बिस्तर पर लेटा गुन-गुनाता है-
आज इस हरियाणा मैं दौर दमन का चाल्या रै।।
किसान पै चालै गोली मजदूरां पै घेरा डाल्या रै।।
भ्रष्टाचार मैं हरियाणे मैं सभी रिकाट तोड़ दिये
नेता खावै अफसर लूटैं पुलिसिये खुले छोड़ दिये
झूठ के पौ बारा होगे सच्चाई के मटके फोड़ दिये
माफिया बिदेशी कम्पनी तै खूबै रिश्ते जोड़ लिये
कष्ट कमाई इन्साना की ईपै घपताड़ा घाल्या रै।।
अपणी लूट पै पोटो नहीं हड़ताल म्हारी बी रड़कै
हक मांगण लागै जनता सरकार कसूती फड़कै
आहमी साहमी होवण मैं बस कसर सांझ ओर तड़कै
पांच सितारा होटल लेरे म्हारा दरवाजा बी खड़कै
सुबो शाम जुल्म खेवा हम जिब तै होस सम्भाल्या रै।।
हम आह भरै बदनाम होज्यां इनके कत्ल माफ सैं
म्हारी तनखा रड़कै सै करना चाहते ये हाफ सैं
दिन धौली मैं बदफेली करते फेर बी ये साफ सैं
इननै महारी सौड़ खोसली बचे म्हारे पै लिहाफ सैं
इनकी काली करतूतां नै सबका हिया साल्या रै।।
जिसे बोवैं उसे काटैंगे बचैगा आज गरूर नहीं
गादड़ गाम सूही भाज लिया यौ सै म्हारा कसूर नहीं
इनका बहोत चाल लिया चालै और फतूर नहीं
इनका गिरकाणा म्हारी गेल्यां हमनै ये मंजूर नहीं
हरियाणे का हाल देखकै रणबीर का दिल हाल्या रै।।
वार्ता
घायलों को देखने अस्पताल जाने-वाले जन प्रतिनिधियो परं राजनैतिक रोटियां सेंकने का बेहुदा आरोप लगाने के पीछे भी दो तरह के कारक नजर आते हैं। एक वे सरकारी अधिकारी जिन पर कम्पनी से गड़ियां तक के तोहफे लेने के आरोप हैं और अपनी पोल खुलने से घबराते हैं। दूसरे वो जो अवसरवादी दलों के नेताओं के दोहरे चरित्र से जायज तौर पर खफा हैं। यदि आंख मूंद कर विदेशी पूंजी को पवित्र गाय की तरह देखा जाता रहा तो इसके देश भर मेें खतरनाक नतीजे होंगे। हरियाणे के इस सारे मसले को हरियाणा का एक आम किसान मजदूर कैसे देख रहा था क्या बताया भलाः
8-
जिब भी सै आवाज उठाई, म्हारी कसूती श्यामत आई, चढ़गी फेर म्हारी करड़ाई
हरि के हरियाणे मैं।।
होंडा के मालिक गिरकाए, संग मैं पुलिस प्रशासन बताए
पुलिस साथियों भांग खारी, फैक्ट्री सै घेरी सारी, लाठी चार्ज करदी भारी
हरि के हरियाणे मैं।।
धरती हुई खून मैं लाल, खुश हुये होंडा के दलाल
नम्बर उनके होगे डायल, मजदूर करे काफी घायल, जनता होगी बेहद कायल
हरि के हरियाणे मैं।।
पूरा हरियाणा दंग रैहग्या पुलिस प्रशासन का यो ढंग रैहग्या
सी एम बौखलाया देख्या, पी एम भन्नाया देख्या, सोनिया नै दुख जताया देख्या
हरि के हरियाणे मैं।।
जनता सड़का उपर आई सै, तुरत एक्शन की मांग ठाई सै
वाम पंथ जब गुर्राया, सी एम भी काफी घबराया, सुर इनका फेर बदल्या पाया
हरि के हरियाणे मैं।।
वार्ता
शासन की पीठ पर सवार होकर कम्पनी इस अभूत पूर्व दमन के बावजूद मजदूरों की दबा नहीं पाई। जिस मेहनत कश की रोटी रोजी का औैर कोई विकल्प ही नहीं बचा वह अब भी नहीं दबा और आगे भी नहीं दबेगा। पाले बन्दी खीचती जा रही है। यह राजनीतिक पार्टियों और जनता कोे तय करना हैं कि वे किस पाले में खड़ी होगी? साम्राज्यवाद के हक में या विरोध में? मजदूर के हक में या विरोध में? लाल झंडा मजदूर के साथ खड़या रहा और आज भी खड़ा है। एक कर्मचारी क्या सोचता है भलाः
9-
हरे पीले केसरिया सब हाथा मैं ठाकै देख लिये।।
कथनी करनी मैं फर्क घणा सब भीतर जाकै देख लिये।।
होंडा कम्पनी खेल खिलावै खुद रैफरी बणकै रै
हम भी एटैंसन खड़े होज्यां सीटी उसकी सुणकै रै
कदे इनेलो कदे कांग्रेस गाणे गाकै देख लिये।।
सब झण्डयां मैं बढ़िया झण्डा लाल यो पाया रै
डरते-डरते से नै आज अपणे हाथा मैं ठाया रै
कामरेडां नै भूत बतावैं आज हाथ लगाकै देख लिये।।
गरीबां का सही हिम्माती झण्डा लाल दिया दिखाई
बंगाल मैं धरती बांट दई पंचायतां की ताकत बढ़ाई
गरीब आदमी पंचायती सै आंख मिला कै देख लिये।।
लाल झंडे के खिलाफ प्रचार घणा भारया देख्या
गरीब का असली एजैंडा झंडा योहे ठारया देख्या
संकट मैं धोरै पावैगा रणबीर बुलाकै देख लिये।।
वार्ता
अगले दिन 26 तारीख को फिर इसी जनता का जुलूस इस लाठी चार्च के विरोध में निकलता है। पुलिस संसद में गृहमंत्राी के ब्यान के बावजूद जनता से फिर भी सख्ती से पेश आती है। एक बार फिर लाठियों की बौछार का सामना करना पड़ता है। एक लड़का अस्पताल में जख्मी कर्मचारी को खाना देने आता है तो उस पर लाठियां चलाई जाती हैं। उसकी मां टी वी पर यह सब देख रही है तो क्या कहती हैः

10-
या पुलिस हड़खाई लाठी मेरे बेटे पै बरसावै।।
टी वी उपर देख पिटाई दिल मेरा दुख पावै।।
फिटर की करै नौकरी कुल रूपइये तीन हजार मैं
ना छुट्टी मिलै कोए हारी बीमारी होज्या परिवार मैं
तनखा काटैं बेगार कराते यो जापानी खावै।।
किस नै नहीं दीखती होंडा कम्पनी की बदमाशी
उसनै उल्टे कामां की लागै मजदूरा के गल फांसी
होंडा कम्पनी की हेरा-फेरी प्रशासन साथ निभावै।।
जुल्म सहवै बेटा मेरा फेर जमा बोल चुप्पाका रैहग्या
उसकी ढालां दो हजार मजदूर जुलमां नै सहग्या
पाप की हाण्डी पूरी भरगी जब कर्मचारी आवाज उठावै।।
आवाज उठाई तो कम्पनी छोह मैं घणी कसूती आई
बोेली काढ़ बाहर करुंगी जै थामनै यूनियन बनाई
लिखै रणबीर साच्ची ना उंए कलम तै घिसावै।।

वार्ता
एक दिन टी आई सी यू का जलसा गुड़गावां के बस अड्डे के पास होता है। वहां डी सी और एस पी को सस्पैंड करने की मांग भी उठाई जाती है और मजदूरों द्वारा किये समझौते के साथ ही उन्हें आगाह करने की सलाह दी जाती है। साम्राज्यवादी देश कैसे मिलकर तीसरी दुनियां के देशों को लूट रहें हैं। कमाई हम करते हैै। और धन दौलत के मालिक ये बन बैठे हैं। हमारी मेहनत से कमाई धन दौलत का बंटवारा ठीक प्रकार से नहीं हो रहा। इस लिये यह लड़ाई लड़ते हुए हमें एक लम्बी लड़ाई के लिए भी तैयार रहना पड़ेगा। क्या बताया धन दौलत के बंटवारे मेंः
11-
काफी तरक्की हुई देेश मैं रोल करी बंटवारे की।।
वर्ग कमरा सदा दबाया रही निति हिन्द हमारे की।।
सबको मिलै पढ़ाई छः अरब डालर खर्च बताया
अमेरिका में आठ अरब डालर सिंगार पै जावै खिड़ाया
पाणी और सफाई का खर्च नौ अरब डालर पाया
ग्यारा अरब डालर यूरोप मैं आईस क्रीम मै खर्चा आया
चौर सौ अरब डालर का नशा करावैं होज्या शक्ल छुहारे की।।
सब जनता की सेहत की खातर तेरह अरब डालर चाहवैं सैं
रूक्के पड़रे अमीरां के सारै ये म्हारी सेहत घटावैं सैं
अमेरिका यूरोप के कुत्ते बिल्ली सतरा अरब डालर खावैं सैं
जापान मैं मनोरंजन उपर पैंतीस अरब डालर बहावैं सैं
झूठी कोन्या साची सै या तसवीर विकास प्यारे की।।
झूठा नहीं आंकड़ा कोए मानव विकास रिपोर्ट में बतलाया
तीसरी दुनिया चूस बगादी ईब जी सेवन दुनिया में छाया
विश्व बैंक डबल्यू टी ओ नै अमीरों का साथ निभाया
मुद्रा कोष नै डांडी मार म्हारे विनाश का बीड़ा ठाया
नौकरी खत्म करण लागे कविता सविता मुख्तयारे की।।
नशे की दवा और दारू बेचैं दूसरा धन्धा हथियारां का
तीसरा धन्धा इत्र फुलेल का इन अमरीकी साहूकारां का
विकास नहीं विनाश पर टिकग्या जीवन इन थानेदारां का
बटवारा हो तो ठीक दुनिया में राह बंधै इन ठेकेदारां का
अमीर गरीब की खाई मैं मर आई रणबीर बेचारे की।।
वार्ता
शासन और सत्ता जनहित की उपेक्षा करके यदि कम्पनी के समक्ष समर्पण करते रहें तो कम्पनी और मजदूर किसानों के बीच के विवादों में कम्पनी तमाशा देखती रहेगी और पुलिस की लाठी यदि अपने ही देश के नागरिकों के सिर और बाजू तोड़ती रही तो यह सिलसिला ज्यादा समय तक नहीं चल सकता। इसलिये हम सब को इस सवाल से रूबरु होना पड़ेगा कि हम किस ओर हैं? उस जनता की ओर जो चुन कर हमे एसैम्बली और सांसद में भेजती है अथवा बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की ओर जो अपनी एक तरफा शर्र्तों के बल पर श्रमशक्ति, हमारी मार्कीट, राष्ट्रीय सम्पदा और सांस्कृतिक धरोहर को लूटने के लिए नव औपनिवेशिक व्यवस्था निर्मित करना चाहती है? हम सब को अपना पक्ष तय करने मंे कितना समय लगेगा यह तो मालुम नहीं परन्तु बीरमती अपना पक्ष तय कर चुकी है।
12-
पलहम म्हारे चक्कर काटै फेर उड़ै टहल बजावै
जिब हम जावां उसके घोरै कबरां-कबरा सा लखावै
देर्ख-देख नखरे इसके हटकै याद आवै चौटाला रै।।
जो म्हारे असली हिम्मती हमनै देेते नहीं दिखाई क्यों
जात-पात पै लाठा घल्या ना लड़ते असल लड़ाई क्यों
कहै रणबीर बरोनिया करो ताश खेलण का टाला रै।।
वार्ता
हमे बांट कर रखने के लिए, हममें फूट डालने के लिए ईस्ट इंडिया कम्पनी की तरह होंडा कम्पनी ने भी अपना शतरंज का खेल गुड़गांव में जमा दिया है। बाहर और भीतर का खेल-खेल कर वे शतरंज की बाजी में मजदुरों को मात देना चाहते हैं। दूध का दूध और पानी का पानी जनता के सामने आ गया है। बाहर भीतर की राजनीति की धज्जियां उड़ती जा रही हैं। क्या बतलाया कवि ने भलाः
13-
बाहर और भीतर का मसला ठाया जाणा बेइमानी सै।।
हरियाणा दिल्ली आले बाहरी भीतर आला जापानी सै।।
बार-बार बाहरी तत्वां का जिकरां दिया सै सुणाई रै
मजदूर एकता तोड़ण नै मजदूरां मैं गेरी सै खाई रै
कोए यू पी का कोए बिहारी कहते आकै बणै सै जमाई रै
क्षेत्रवाद की जहरी गुड़गांव मैं गुहार भाई सै लाई रै
ये हथकण्डे काम नहीं आये फेर सोची दूजी शैतानी सै।।
दूजे नम्बर तत्व बाहरी ये यूनियन नेता दिखलायें
इतने मैं कोन्या साधी सांसद बी बाहरी गये बतलाये
कांग्रेस के एम एल ए भीतर ल्यां की गिनती मैं आये
ये भीतर के थे ज्यां करकै जापानी सुर मैं सुर मिलाये
होंडा बदेशी कम्पनी धुरतै करती आई मनमानी सै।।
गुड़गावां की दूसरी फैक्ट्री मजदूर जाते दबाये रै
सब सुख दुख की बतला कै वे एक मंच पर आये रै
संयुक्त मंच के बैनर तलै देख जापानी घबराये रै
नागरिक मजदूर नेता बाहरी तो कौन हिंदुस्तानी सै।।
किसा गजब हुआ रै भीतर बाहर-बाहर भीतर होग्या
म्हारी बुद्धि कड़ै चली गई थी मालिक बीज फूट के बोग्या
इस करकै म्हारे तवे पै बदेशी अपणी रोटी पोग्या
हिंदुस्तान फेर गुलाम होवै जै मजदूर ताणकै सोग्या
साचम साच कैहवण की रणबीर बरोनिया नै ठानी सै।।
वार्ता
अगर इन बदेशी कम्पनियों पर और साम्राज्यवाद वेफ खिलापफ आवाज नहीं उठाई जाती तो आने वाले समय भारत वर्ष वेफ लिए भयंकर साबित होगा। यह महज मजदूरों का मसला नही बल्कि पूरे देश की आत्म निर्भरता और आजादी का सवाल है। राष्ट्रीय एकता का सवाल है। कदम-कदम पर जनता की एकता तोड़ने वेफ लिए बारूदी सुरंगे बिछाई जा रहीं हैं निहित स्वार्थों वेफ द्वारा और उन्हें बिछाने का दोषी जनता को ही ठहराया जाने वेफ प्रयत्न जारी हैं। क्या बताया भलाः

14-
बेलगाम बदेशी कम्पनी म्हारा भट्ठा जरूर बिठावैंगी।।
दो चार खूड जो रैहरे सै इनकी निलामी करवावैंगी।।
म्हारे कारखान्या पै हमला एक-एक करक्े बोल रही
छंटनी करक्े मार दिये छाती म्हारी जमा छोल रही
म्हारा जीना दूभर कर दिया पिला सल्फास का घोल रही
किसानां की मशीहा बनती कर फेर बी घणी रोल रही
ये नेता म्हारे खरीद लिए जनता नै सबक सिखावैंगी।।
म्हारे कष्ट दूर करण खातर कारखाणे अपणे लावैं
सस्ती मजदूरी ठेके उपर दिन-रात काम करवावैं
जिब जी मैं आज्या करैं चालता झूठ-मूठ की कमी बतावैं
विरोध करैं जिब मजदूर पुलिस म्हारी तै पिटवावैं
बदेशी कम्पनी हटकै देश नै आंगलिया पै नचावैंगी।।,
दोष म्हारा नहीं कोए फेर बी दोष म्हारे पै मढ़ेै क्यूकर
शिक्षा इतनी म्हंगी कर दी म्हारे बालक पढ़ै क्यूकर
पढ़ नहीं सके तो बताओं कम्पीटीशन मैं कढ़ै क्यूकर
पहली पैड़ी पै रोक लिए आगली पैड़ी पै चढं़ै क्यूकर
कुछ लोगां नै बणा चमचे बाकी नै नरक मैं धकावैंगी।।
म्हारे बालक उनकी कारां मैं ड्राइवरी का काम करैंगे
बर्तन मांजैं और सफाई घरा मै ये सुबो शाम करैंगे
रणबीर करै पहरेदारी जिब वे लेट ऐशो आराम करैंगे
भारत की महिलावां पै ये पापी हमले तमाम करैंगे
ट्रेलर नै सांस चढ़ाये के होगा पूरी फिल्म जिब दिखावैंगीं।।