रविवार, 29 जनवरी 2017

KISSABHAGAT SINGH

रागनी 1
सोने की चिड़िया  भारत म्हारा इसका हाल देखले आकै  ॥ 21 
जिसा चाहया थामनै कोन्या हमनै देख्या हिसाब लगाकै ॥ 
मेनत कश देशवासियों नै यो खून पसीना एक करया 
खेत कारखाने खूब कमाए यो देश खजाना खूब भरया 
टाटा अम्बानी लूट कै लेगे आज अपने प्लान बनवाकै ॥ 
तीनों फांसी का फन्दा चुम्मे दुनिया मैं इतिहास बनाया 
थारी क़ुरबानी नै भारत मैं  आजादी का अलख जगाया 
दिखावा करैं थारे नाम का असल मैं धरे टांड पै बिठाकै ॥ 
भ्रष्टाचार ठाठे मारै देखो दिल्ली के राज दरबारों मैं 
कुछ भृष्ट नेता भ्रष्ट अफसर मौज करैं सरकारों मैं 
बाट आजादी के फ़लां की आज  हम देखां सां मुंह बाकै ॥ 
प्रेरणा लेकै थारे तैं हम आज कसम उठावां सारे रै 
ज्यान की बाजी लाकै नै सपने पूरे करां थारे रै 
लिखै रणबीर साची सारी आज एक एक बात जमाके ॥ 

रागनी --2 

जनता की जनवादी क्रांति हम बदल जरूर ल्यावाँगे रै ॥  22 
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥ 
जनतन्त्र का मुखौटा पहर कै राज करै सरमायेदारी या 
जल जंगल जमीन धरोहर बाजार के मैं बेचै म्हारी या 
हम लोगां का लोगां की खातर लोगां का राज चलावांगे रै ॥ 
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥ 
कौन लूटै जनता नै इब सहज सहज पहचान रहे 
आज घोटाले पर घोटाले कर ये कारपोरेट बेईमान रहे 
एक दिन मिलकै इन सबनै हम जेल मैं पहोंचावांगे रै  ॥ 
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥ 
जनता जाओ चाहे भाड़ मैं बिदेशी पूंजी तैं हाथ  मिलाया 
दरवाजे खोल दिए उन ताहिं गरीबाँ का सै भूत बनाया 
जमा बी हिम्मत नहीं हारां मिलकै नै सबक सिखावांगे रै ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥ 
बढ़ा जनता मैं  बेरोजगारी ये नौजवान भटकाये देखो  
जात पात गोत नात मैं बांटे आपस मैं भिड़वाये देखो 
किसान मजदूर के दम पै करकै संघर्ष दिखावांगे रै ॥ 



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