पृथवी सिंह बेधड़क
१
मेहनत काश मजदूर की , हड्डी चूर चूर की
खून पिया जाता है ॥
1 28 रूपये मन गेहूं उन्हें 40 क्यों दिए गए
कुछ कम तोल्या बेईमानी से दूने लिए
कर दिया नाश कर्महीन का दो ढाई तीन का
सूद लिया जाता है॥
2 भूमिहीन बहन कोई गज साग तोड़ने जावै
खेत के मालिक दूर जोर से गाली बुरी सुणावै
निकल खेत से मेरी सोहरी , नहीं तो मारूं तेरे लठौरी
न्यून रूक्का दिया जाता है ॥
3 लगा ढेकली जोहड़ किनारे सब्जी लगाते हैं
सूदखोर भूमिधर उन पर जुल्म ढाते हैं
ना पैसा ना अन्न का दाना मुफ्त मैं उनका रोजाना
तोरी घिया जाता है ॥
4 अगर दवाई लेने चले तो घर में पैसा ना
एक गोली भी मुफ्त मैं दे कोई वैद्य ऐसा ना
रोते हैं चिल्लाते हैं पड़े पड़े कर्राहते हैं
मुश्किल जिया जाता है ॥
5 भाई भतीजा बेटा बिगड़ा बाबा बिगड़ गया
पृथ्वी सिंह कहै सब आवा बिगड़ गया
रिश्वतखोरी चोरी हो राज की यह कमजोरी हो
जो जुल्म किया जाता है ॥
१
मेहनत काश मजदूर की , हड्डी चूर चूर की
खून पिया जाता है ॥
1 28 रूपये मन गेहूं उन्हें 40 क्यों दिए गए
कुछ कम तोल्या बेईमानी से दूने लिए
कर दिया नाश कर्महीन का दो ढाई तीन का
सूद लिया जाता है॥
2 भूमिहीन बहन कोई गज साग तोड़ने जावै
खेत के मालिक दूर जोर से गाली बुरी सुणावै
निकल खेत से मेरी सोहरी , नहीं तो मारूं तेरे लठौरी
न्यून रूक्का दिया जाता है ॥
3 लगा ढेकली जोहड़ किनारे सब्जी लगाते हैं
सूदखोर भूमिधर उन पर जुल्म ढाते हैं
ना पैसा ना अन्न का दाना मुफ्त मैं उनका रोजाना
तोरी घिया जाता है ॥
4 अगर दवाई लेने चले तो घर में पैसा ना
एक गोली भी मुफ्त मैं दे कोई वैद्य ऐसा ना
रोते हैं चिल्लाते हैं पड़े पड़े कर्राहते हैं
मुश्किल जिया जाता है ॥
5 भाई भतीजा बेटा बिगड़ा बाबा बिगड़ गया
पृथ्वी सिंह कहै सब आवा बिगड़ गया
रिश्वतखोरी चोरी हो राज की यह कमजोरी हो
जो जुल्म किया जाता है ॥
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें